इंटरमिटेंट डाइवर्जेंट स्क्विंट (Intermittent Divergent Squint): क्या आपके बच्चे की एक आँख कभी-कभी बाहर चली जाती है?

लेखिका: डॉ. मनीषा मिश्रा

सीनियर कैटरैक्ट एवं स्क्विंट सर्जन | बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ (Pediatric Ophthalmologist)
शांतनु नेत्रालय, वाराणसी

“डॉक्टर साहब, हमारे बच्चे की आँख कभी-कभी बाहर चली जाती है, लेकिन फिर अपने आप ठीक हो जाती है।”

यदि आपने भी अपने बच्चे में ऐसा देखा है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें।

पूर्वांचल और वाराणसी में कई माता-पिता सोचते हैं कि “बच्चा बड़ा होगा तो अपने आप ठीक हो जाएगा।” लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार यह इंटरमिटेंट डाइवर्जेंट स्क्विंट (Intermittent Exotropia) नाम की समस्या हो सकती है, जिसका समय पर इलाज बहुत ज़रूरी होता है।

इंटरमिटेंट डाइवर्जेंट स्क्विंट क्या है?

सामान्य स्थिति में हमारी दोनों आँखें एक ही दिशा में मिलकर काम करती हैं।

लेकिन इंटरमिटेंट डाइवर्जेंट स्क्विंट में एक आँख कभी-कभी बाहर (Side की ओर) चली जाती है। यह हर समय नहीं होता, इसलिए कई परिवार इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं

शुरुआत में बच्चा अपनी आँखों को वापस सीधा कर लेता है, लेकिन समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है।

किन परिस्थितियों में आँख बाहर जाती है?

अक्सर माता-पिता बताते हैं कि—

  • बच्चा दूर देखते समय आँख बाहर कर देता है।
  • टीभी देखते समय ऐसा होता है।
  • धूप में निकलते ही एक आँख बंद कर लेता है।
  • थकान या नींद आने पर आँख बाहर चली जाती है।
  • पढ़ाई के बाद या देर तक मोबाइल देखने के बाद ऐसा अधिक दिखता है।
  • फोटो में कभी-कभी एक आँख अलग दिशा में दिखाई देती है।

अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो नेत्र विशेषज्ञ से जाँच कराना आवश्यक है।

ऐसा क्यों होता है?

इसके कई कारण हो सकते हैं—

  • जन्म से आँखों का संतुलन पूरी तरह विकसित न होना।
  • परिवार में पहले किसी को स्क्विंट होना।
  • दोनों आँखों के बीच तालमेल कमजोर होना।
  • चश्मे का नंबर होना।
  • कम दिखाई देना (Poor Vision)।
  • कुछ बच्चों में बिना किसी स्पष्ट कारण के भी यह समस्या हो सकती है।

क्या यह सिर्फ दिखने की समस्या है?

नहीं।

यदि इलाज में देर हो जाए तो इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं—

1. गहराई पहचानने की क्षमता (Depth Perception) कम हो सकती है।

बच्चे को गेंद पकड़ने, सीढ़ियाँ उतरने या खेलते समय कठिनाई हो सकती है।

2. दोनों आँखों का तालमेल बिगड़ सकता है।

मस्तिष्क दोनों आँखों से आने वाली तस्वीरों को सही तरीके से जोड़ नहीं पाता।

3. स्क्विंट स्थायी हो सकता है।

जो आँख पहले केवल कभी-कभी बाहर जाती थी, वह बाद में हर समय बाहर रहने लग सकती है।

4. आत्मविश्वास पर असर

स्कूल जाने वाले बच्चों में कई बार दूसरे बच्चे मजाक उड़ाते हैं, जिससे आत्मविश्वास कम हो सकता है।

किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?

यदि आपके बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण है—

  • एक आँख कभी-कभी बाहर चली जाती है।
  • धूप में एक आँख बंद करता है।
  • बार-बार आँखें मिचमिचाता है।
  • ध्यान लगाने में कठिनाई होती है।
  • फोटो में बार-बार आँख टेढ़ी दिखती है।
  • पढ़ाई के समय शिकायत करता है कि आँखें थक जाती हैं।

तो नेत्र परीक्षण अवश्य कराएँ।

डॉक्टर इसकी जाँच कैसे करते हैं?

शांतनु नेत्रालय में बच्चे की उम्र के अनुसार विस्तृत जाँच की जाती है—

  • दृष्टि (Vision Test)
  • चश्मे के नंबर की जाँच
  • आँखों की मूवमेंट की जाँच
  • स्क्विंट का कोण (Angle of Squint)
  • दोनों आँखों के तालमेल की जाँच
  • बाइनोकुलर विज़न और स्टीरियो विज़न (Depth Perception) का मूल्यांकन

इन जाँचों के आधार पर इलाज तय किया जाता है।

क्या हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत होती है?

नहीं।

हर बच्चे का इलाज अलग होता है।

समस्या की गंभीरता के अनुसार इनमें से एक या अधिक उपचार दिए जा सकते हैं—

  • सही नंबर का चश्मा
  • आँखों की एक्सरसाइज (चयनित मामलों में)
  • नियमित फॉलो-अप
  • एम्ब्लायोपिया (Lazy Eye) होने पर उसका उपचार
  • आवश्यकता होने पर स्क्विंट सर्जरी

स्क्विंट सर्जरी कब करनी पड़ती है?

यदि—

  • आँख बार-बार बाहर जाने लगे।
  • समय के साथ समस्या बढ़ रही हो।
  • दोनों आँखों का संतुलन खराब हो रहा हो।
  • बच्चे की डेप्थ परसेप्शन प्रभावित हो रही हो।
  • चेहरे की बनावट पर स्पष्ट असर दिखने लगे।

तो सर्जरी सबसे प्रभावी विकल्प हो सकती है।

आजकल स्क्विंट सर्जरी सुरक्षित, वैज्ञानिक और अत्यधिक सफल प्रक्रिया है। सही समय पर की गई सर्जरी से आँखों का संतुलन बेहतर होता है और दोनों आँखों के साथ काम करने की क्षमता में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

माता-पिता कौन सी गलतियाँ करते हैं?

❌ “अभी छोटा है, बड़ा होकर ठीक हो जाएगा।”

❌ “कोई दिक्कत नहीं है, कभी-कभी ही तो होता है।”

❌ “ऑपरेशन से आँख खराब हो जाएगी।”

❌ “लोग क्या कहेंगे, इसलिए अभी नहीं दिखाते।”

ये धारणाएँ इलाज में देरी कर सकती हैं।

माता-पिता क्या करें?

✔️ बच्चे की पुरानी और नई फोटो ध्यान से देखें।

✔️ यदि एक आँख बार-बार बाहर जाती दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें।

✔️ जल्द से जल्द बाल नेत्र रोग एवं स्क्विंट विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।

✔️ नियमित फॉलो-अप कराते रहें।

पूर्वांचल के माता-पिता के लिए एक संदेश

हमारे पास वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, बलिया, मऊ और पूरे पूर्वांचल से ऐसे बच्चे आते हैं जिनकी आँख महीनों या वर्षों से कभी-कभी बाहर जाती थी, लेकिन परिवार ने इसे सामान्य समझकर इंतजार किया।

अच्छी बात यह है कि यदि समय रहते सही जाँच और उचित उपचार कराया जाए, तो अधिकांश बच्चों में बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं

बच्चे की आँखों का संतुलन केवल उसके चेहरे की सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि उसके देखने, सीखने, खेलने और आत्मविश्वास से भरे भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. मनीषा मिश्रा के बारे में

डॉ. मनीषा मिश्रा वरिष्ठ कैटरैक्ट एवं स्क्विंट सर्जन तथा बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। उन्हें बच्चों में स्क्विंट, लेज़ी आई, जन्मजात मोतियाबिंद, बच्चों की आँखों की बीमारियों तथा जटिल स्क्विंट सर्जरी के उपचार का व्यापक अनुभव है। उनका उद्देश्य केवल आँखों को सीधा करना नहीं, बल्कि बच्चे की दोनों आँखों की देखने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

यदि आपके बच्चे की एक आँख कभी-कभी बाहर चली जाती है, तो इसे सामान्य न समझें।

समय पर सही जाँच, सही इलाज और सही सलाह आपके बच्चे की दृष्टि और भविष्य दोनों की रक्षा कर सकती है।