रेटिना की नस बंद होना (Retinal Vascular Occlusion): आँख के अंदर अचानक होने वाला “स्ट्रोक” जिसे कभी भी नजरअंदाज न करें
लेखक: डॉ. शांतनु गुप्ता
सीनियर कैटरैक्ट सर्जन एवं मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ
शांतनु नेत्रालय, वाराणसी
“डॉक्टर साहब, सुबह उठे तो एक आँख से धुंधला दिखने लगा… ऐसा लगा जैसे सामने पर्दा आ गया हो।”
यह शिकायत मैं अपने क्लिनिक में अक्सर सुनता हूँ।
कई मरीज पहले चश्मा बदलवाने की सोचते हैं, कुछ लोग दवा की दुकान से आई ड्रॉप ले लेते हैं, जबकि कुछ इंतजार करते रहते हैं कि शायद अपने आप ठीक हो जाएगा।
लेकिन कई बार इसका कारण रेटिना की नस का अचानक बंद हो जाना (Retinal Vascular Occlusion) होता है। यह आँख की ऐसी गंभीर बीमारी है जिसे आप आँख का स्ट्रोक (Eye Stroke) भी कह सकते हैं।
समय पर इलाज न मिलने पर दृष्टि हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है।
रेटिना क्या होती है?
आँख के सबसे पीछे एक बेहद संवेदनशील परत होती है जिसे रेटिना कहते हैं।
कैमरे में जैसे फिल्म या डिजिटल सेंसर तस्वीर रिकॉर्ड करता है, उसी तरह रेटिना प्रकाश को पहचानकर मस्तिष्क तक संदेश भेजती है।
यदि रेटिना तक खून पहुँचाने वाली नस बंद हो जाए या खून वापस ले जाने वाली नस जाम हो जाए, तो रेटिना ठीक से काम नहीं कर पाती।
रेटिना की नस कैसे बंद होती है?
रेटिना में दो प्रकार की रक्त वाहिकाएँ होती हैं—
- धमनी (Retinal Artery) – जो ऑक्सीजन और पोषण लेकर आती है।
- शिरा (Retinal Vein) – जो इस्तेमाल हुआ रक्त वापस ले जाती है।
इनमें से किसी भी नस में रुकावट आने पर दृष्टि अचानक कम हो सकती है।
रेटिना की नस बंद होने के प्रकार
1. रेटिनल वेन ऑक्लूजन (Retinal Vein Occlusion)
इसमें आँख की नस से खून का बहाव रुक जाता है।
नतीजा—
- रेटिना में सूजन
- खून के धब्बे (Hemorrhage)
- मैक्युला में पानी भरना (Macular Edema)
- धंधला दिखाई देना
यह अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
2. रेटिनल आर्टरी ऑक्लूजन (Retinal Artery Occlusion)
यह अधिक गंभीर स्थिति होती है।
रेटिना तक ऑक्सीजन पहुँचाने वाली धमनी अचानक बंद हो जाती है।
कुछ ही मिनटों में रेटिना को नुकसान शुरू हो सकता है।
इसे वास्तविक चिकित्सा आपातकाल (Medical Emergency) माना जाता है।
किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है?
मेरे अनुभव में निम्न लोगों में यह बीमारी अधिक देखने को मिलती है—
- लंबे समय से डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- धूम्रपान
- हृदय रोग
- अनियमित धड़कन (Atrial Fibrillation)
- बढ़ती उम्र
- मोटापा
- किडनी की बीमारी
- रक्त के थक्के बनने की समस्या
यानी आँख की यह बीमारी अक्सर पूरे शरीर के स्वास्थ्य का संकेत भी हो सकती है।
इसके लक्षण क्या हैं?
यदि इनमें से कोई भी लक्षण अचानक हो—
- एक आँख से अचानक धुंधला दिखना
- सामने काला धब्बा दिखाई देना
- दृष्टि का एक हिस्सा गायब लगना
- बिना दर्द के अचानक नजर कम होना
- ऐसा लगे जैसे आँख के सामने पर्दा आ गया हो
तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से मिलें।
क्या इसमें दर्द होता है?
अधिकांश मामलों में नहीं।
यही कारण है कि लोग इसे गंभीर नहीं समझते।
लेकिन बिना दर्द के भी दृष्टि तेजी से प्रभावित हो सकती है।
क्या यह सिर्फ आँख की बीमारी है?
नहीं।
जब किसी व्यक्ति की रेटिना की नस बंद होती है, तो हमें यह भी सोचना पड़ता है कि कहीं शरीर की दूसरी नसों में भी ऐसी समस्या तो नहीं हो रही।
कई बार यह भविष्य में होने वाले ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट अटैक के बढ़े हुए जोखिम का संकेत हो संकेत हो सकता है।
इसलिए केवल आँख का इलाज ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर की जाँच भी आवश्यक होती है।
इसकी जाँच कैसे होती है?
रेटिना विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत जाँच की जाती है।
आवश्यकतानुसार—
- आँख की पुतली फैलाकर रेटिना की जाँच
- OCT (Optical Coherence Tomography)
- OCT Angiography (चयनित मामलों में)
- Fundus Photography
- Fluorescein Angiography (जब आवश्यकता हो)
इसके साथ-साथ कई मरीजों में सलाह दी जा सकती है—
- ब्लड प्रेशर की जाँच
- ब्लड शुगर
- HbA1c
- लिपिड प्रोफाइल
- ECG
- इकोकार्डियोग्राफी
- कैरोटिड धमनियों की जाँच
- फिजिशियन या कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श
इसका इलाज क्या है?
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी नस बंद हुई है और कितना नुकसान हुआ है।
उपचार में शामिल हो सकते हैं—
Anti-VEGF Injection
यदि मैक्युला में सूजन हो गई है, तो आँख के अंदर विशेष इंजेक्शन दिए जाते हैं जिससे सूजन कम होती है और दृष्टि सुधारने में मदद मिलती है।
Retina Laser
कुछ मरीजों में रेटिना लेज़र की आवश्यकता होती है ताकि नई असामान्य रक्त वाहिकाएँ बनने से रोका जा सके।
अन्य उपचार
जरूरत के अनुसार स्टेरॉयड इंजेक्शन, नियमित निगरानी और शरीर की अन्य बीमारियों का नियंत्रण भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
क्या दृष्टि पूरी तरह वापस आ जाती है?
यह हर मरीज में अलग-अलग होता है।
परिणाम कई बातों पर निर्भर करते हैं—
- कितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुँचा
- कौन-सी नस बंद हुई
- मैक्युला प्रभावित हुआ या नहीं
- उपचार कितनी जल्दी शुरू हुआ
- पहले से डायबिटीज या ब्लड प्रेशर कितना नियंत्रित था
इसलिए जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी बेहतर संभावना होती है।
इसे कैसे रोका जा सकता है?
पूरी तरह हर मामले को रोकना संभव नहीं है, लेकिन जोखिम काफी कम किया जा सकता है—
✔️ ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें।
✔️ डायबिटीज का अच्छा नियंत्रण रखें।
✔️ कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच कराएँ।
✔️ धूम्रपान पूरी तरह छोड़ें।
✔️ नियमित व्यायाम करें।
✔️ साल में कम से कम एक बार रेटिना की जाँच कराएँ, विशेषकर यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है या आपको डायबिटीज है।
पूर्वांचल के लोगों के लिए मेरी सलाह
वाराणसी और पूरे पूर्वांचल में आज डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके साथ रेटिना की नस बंद होने के मामले भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
दुर्भाग्य से कई मरीज पहले घरेलू उपचार या आई ड्रॉप से राहत खोजते हैं और जब तक रेटिना विशेषज्ञ तक पहुँचते हैं, तब तक काफी समय निकल चुका होता है।
यदि आपकी या आपके किसी परिजन की एक आँख से अचानक बिना दर्द के दृष्टि कम हो जाए, तो इसे सामान्य कमजोरी, चश्मे का नंबर या मोतियाबिंद समझकर इंतजार न करें।
यह रेटिना की नस बंद होने का संकेत भी हो सकता है और ऐसे समय में हर घंटा महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. शांतनु गुप्ता के बारे में
डॉ. शांतनु गुप्ता वरिष्ठ कैटरैक्ट सर्जन एवं मेडिकल रेटिना विशेषज्ञ हैं। उन्हें डायबिटिक रेटिनोपैथी, रेटिनल वेन ऑक्लूजन, रेटिनल आर्टरी ऑक्लूजन, मैक्युलर रोगों, रेटिना लेज़र तथा इंट्राविट्रियल इंजेक्शन सहित विभिन्न रेटिना रोगों के निदान और उपचार का व्यापक अनुभव है। उनका उद्देश्य केवल दृष्टि बचाना ही नहीं, बल्कि मरीजों को बीमारी के कारणों, जोखिमों और समय पर इलाज के महत्व के बारे में जागरूक करना भी है।
याद रखें
अचानक एक आँख से कम दिखाई देना कभी भी सामान्य बात नहीं है।
यदि बिना दर्द के भी आपकी दृष्टि अचानक धुंधली हो जाए, तो उसी दिन रेटिना विशेषज्ञ से जाँच कराएँ। समय पर उपचार आपकी आँखों की रोशनी बचा सकता है।
